भारत में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में गृह मंत्रालय और सुरक्षा बलों ने पिछले कुछ वर्षों में निर्णायक बढ़त हासिल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भारत के नक्सल-मुक्त होने का दावा केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि जमीनी डेटा, मौतों में भारी गिरावट, नक्सली कैडर के सामूहिक समर्पण और रेड कॉरिडोर के सिमटने पर आधारित है।

डेटा और आंकड़ों की जुबानी: नक्सलवाद की गिरावट

गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

  • हिंसा की घटनाओं में कमी:

    वर्ष 2010 में देश में नक्सली हिंसा की अधिकतम 2,213 घटनाएं दर्ज की गई थीं। वर्ष 2024 में यह घटकर 374 और 2026 के मध्य तक मात्र 33 घटनाओं पर सिमट गई—यानी हिंसा में 98-99% की कमी आई है।

  • कैजुअल्टी में गिरावट (नागरिक + सुरक्षा बल):

    2010 में नक्सली हिंसा में 1,005 मौतें हुई थीं। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 150 पर आ गया और 2026 तक यह घटकर 11 रह गया।

Naxalism was the biggest internal security challenge facing India
  • नक्सल-प्रभावित जिलों की संख्या:

    एक समय 2005-2010 के दौरान देश के लगभग 126 से अधिक जिले "लाल गलियारे" (Red Corridor) के अंतर्गत आते थे। 2024 में यह संख्या 38 रह गई और 2026 तक आते-आते MHA ने 'एक्टिव नक्सल प्रभावित' श्रेणी के जिलों की संख्या शून्य घोषित की है (शेष जिलों को विकास और सुरक्षा बनाए रखने के लिए 'Legacy & Thrust' श्रेणी में रखा गया है)।

STATUS OF NAXALISM IN THE COUNTRY

रीढ़ की हड्डी तोड़ी: शीर्ष नेताओं का खात्मा और सरेंडर

नक्सली संगठन (CPI-Maoist) के इतिहास का सबसे बड़ा ढांचागत संकट हाल के समय में सामने आया है:

  • शीर्ष नेताओं का न्यूट्रलाइजेशन: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ के जंगलों में केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF, CoBRA) और राज्य पुलिस (DRG) ने टारगेटेड ऑपरेशन्स चलाकर 9 करोड़ रुपये से अधिक के इनामी शीर्ष नेताओं (जैसे पोलितब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के सदस्य) को या तो ढेर किया या उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया।

    • नम्बाला केशव राव (बसवराजू): सीपीआई (माओवादी) के पूर्व महासचिव मई 2025 में छत्तीसगढ़ में एक मुठभेड़ में मारे गए थे।

    • मदवी हिदमा: बस्तर क्षेत्र का एक कुख्यात सामरिक कमांडर, वह 2025 के अंत में एक अभियान में मारा गया था।

    • थिप्पिरी तिरुपति (देवजी): एक वरिष्ठ रणनीतिकार जिन्होंने 2026 की शुरुआत में अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

    • मिसिर बेसरा: केंद्रीय समिति के एक अनुभवी सदस्य और विचारक, जिन्हें जुलाई 2026 में झारखंड में गिरफ्तार किया गया था।

  • ऐतिहासिक सामूहिक सरेंडर:

    अक्टूबर 2025 में जगदलपुर (छत्तीसगढ़) में एक साथ 208 नक्सली कैडरों (जिनमें सेंट्रल कमेटी मेंबर रूपेश उर्फ सतीश और 110 महिला कैडर शामिल थे) ने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया। इसके अलावा गढ़चिरौली में पोलितब्यूरो मेंबर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव (सोनू) समेत दर्जनों कैडरों ने मुख्यधारा में वापसी की।

  • जो क्षेत्र कभी 'रेड ज़ोन' कहे जाते थे (जैसे सुकमा का टोंडा mark, डब्बा mark, बीजापुर का सिलगेर आदि), वहां आज स्कूल, राशन दुकानें, पक्की सड़कें और 4G मोबाइल टावर चालू हो चुके हैं।

'नक्सल गढ़' कहे जाने वाले बस्तर और अबूझमाड़ जिन इलाकों में कभी संविधान की जगह नक्सलियों का "जन अदालत" कानून चलता था, वहां की रोजमर्रा की जिंदगी तेजी से बदल रही है:

  • अबूझमाड़ और सुकमा-बीजापुर: जो क्षेत्र कभी नो-गो ज़ोन (No-Go Zones) थे, वहां 250 से ज्यादा नए सुरक्षा शिविर (Forward Operating Bases) स्थापित किए गए हैं। इन बेस कैंपों की वजह से स्थानीय आदिवासियों को राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा की सीधी पहुंच मिली है।

  • सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी: 'फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन' और सुरक्षा बलों के संरक्षण में राष्ट्रीय राजमार्ग और सड़कें जंगलों के भीतर तक पहुंच चुकी हैं। स्थानीय युवा अब बंदूक उठाने के बजाय मोबाइल नेटवर्क, पीएम श्री स्कूलों और स्किल डेवलपमेंट सेंटर से जुड़ रहे हैं।

सरकार की रणनीति: डॉक्टर रमन सिंह के दौर से मोदी-अमित शाह मॉडल तक

नक्सलवाद के खात्मे की रणनीति दो चरणों में विकसित हुई:

  • रमन सिंह सरकार का योगदान (छत्तीसगढ़ पूर्व दौर): रमन सिंह के कार्यकाल में 'सलवा जुडूम' (विवादास्पद लेकिन स्थानीय प्रतिरोध) और पीडीएस (₹1 किलो चावल योजना) ने आदिवासियों में भुखमरी मिटाकर नक्सली भर्ती की रीढ़ तोड़ी। साथ ही बुनियादी पुलिसिंग ढांचा मजबूत किया गया।

  • मोदी-अमित शाह का राष्ट्रीय मॉडल (National Policy & Action Plan 2015):

    1. सुरक्षा बल और वित्तीय शिकंजा: ईडी और एनआईए के जरिए नक्सलियों के लेवी/वसूली रैकेट और फंडिंग नेटवर्क को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया।

    2. फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB): जंगलों के बेहद अंदरूनी हिस्सों में सुरक्षा कैंप स्थापित कर नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने खत्म कर दिए गए।

    3. विकास और पुनर्वास नीति (Poona Narkom / Poona Margem): समर्पित आत्मसमर्पण नीति के तहत हथियार छोड़ने वाले नक्सलियों को वित्तीय सहायता, नौकरी और सुरक्षा की गारंटी दी गई।

      गोंडी बोली (स्थानीय आदिवासी भाषा) के इन शब्दों का सीधा अर्थ है— "पुना नर्कोम = नई सुबह / नई शुरुआत" और "पुना मार्गेम = पुनर्वास से पुनर्जन्म / मुख्यधारा का रास्ता"।

      • पुना नर्कोम अभियान :इसका मुख्य उद्देश्य दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय निचले और मध्य स्तर के नक्सली कैडरों (मिलिशिया, डीएकेएमएस, सीएनएम आदि) और ग्रामीणों तक यह संदेश पहुंचाना था कि हिंसक रास्ता निरर्थक है।

      • पुना मार्गेम अभियान :इसमें आत्मसमर्पित नक्सलियों को सिर्फ हथियार डालने तक सीमित न रखकर उनके सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास (Rehabilitation) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

    4. जमीनी स्तर पर सूचना अभियान: पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा "नुक्कड़ नाटक", स्थानीय भाषाओं में रेडियो संदेश और दूरदराज के गांवों में नए स्कूल-अस्पताल बनाकर विश्वास बहाल किया गया। गोंडी और हलबी भाषाओं में पैम्फलेट, रेडियो संदेश और नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से नक्सलियों को बताया जाता है कि उनकी अपनी ही ज़मीन पर बाहरी नक्सली नेता उनका शोषण कर रहे हैं।

Choking the Support System

पुनर्वास के तहत मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं:

  • तत्काल आर्थिक सहायता: सरेंडर करते ही प्रत्येक कैडर को ₹50,000 की तत्काल नकद वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

  • इनाम की राशि का हस्तांतरण: नक्सली कैडर पर जो भी इनामी राशि (Bounty) घोषित होती है, सरेंडर करने पर वह राशि सीधे उसी कैडर को उसके पुनर्वास के लिए दे दी जाती है।

  • हथियार सौंपने पर अतिरिक्त बोनस: AK-47, SLR या INSAS जैसे आधुनिक हथियार सौंपने पर अलग से नकद प्रोत्साहन राशि मिलती है।

  • आवास और कौशल विकास: प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान, स्किल डेवलपमेंट (ड्राइविंग, प्लंबिंग, सिलाई आदि) की ट्रेनिंग, और रोजगार/स्वरोजगार के अवसर दिए जाते हैं।

  • मुकदमों से राहत: आत्मसमर्पण के बाद राज्य सरकार द्वारा नियमानुसार पुराने मामलों की समीक्षा की जाती है।

Chhattisgarh's Journey from Naxalism to Development

आज किन इलाकों में एक्टिव है नक्सलवाद और 'अर्बन नक्सल' की चुनौती

वर्तमान में बंदूकधारी (हथियारबंद) नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर के कुछ छोटे पॉकेट्स और झारखंड-महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों तक ही सीमित रह गया है।

पीएम मोदी किस नक्सलवाद की बात कर रहे हैं?

  1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने संबोधन में कहा कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद और माओवाद का लगभग खात्मा हो चुका है, लेकिन अब देश को 'दिमागी नक्सल' (Brain Naxal) से सावधान रहने की जरूरत है। तकनीक, ड्रोन surveillance और सघन ऑपरेशन्स के दौर में अब जंगलों में हथियार लेकर पैरेलल सरकार चलाना लगभग असंभव हो गया है।

  2. विचारधारात्मक / अर्बन नक्सलवाद: सरकार का मानना है कि बंदूकों वाला नक्सलवाद तो भौतिक रूप से खत्म हो रहा है, लेकिन शहरों, शैक्षणिक संस्थानों और डिजिटल स्पेस में पनपने वाला "वैचारिक नक्सलवाद" (जो युवाओं को भड़काने और सुरक्षा तंत्र को कानूनी/सामाजिक रूप से कमजोर करने का काम करता है) बंदूकों से भी अधिक खतरनाक है। वर्तमान ध्यान अब इसी नेटवर्क के डिजिटल और फाइनेंशियल सिंडिकेट को खत्म करने पर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की युवा पीढ़ी को विकसित भारत के निर्माण और मुख्यधारा से जोड़ना होगा, तथा इन वैचारिक रूप से अराजक तत्वों को पहचान कर उन्हें अलग-थलग (आइसोलेट) करना जरूरी है।

  3. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आधिकारिक तौर पर भारत को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त घोषित कर दिया, जिससे 31 मार्च, 2026 तक कई दशकों से चले आ रहे इस उग्रवाद को खत्म करने का उनका पूर्व निर्धारित लक्ष्य पूरा हो गया।.

Paying tribute to all CAPF personnel, Home Minister Shri Amit Shah

भारत सरकार की भूमिका और अंतिम निष्कर्ष

केंद्र में नेतृत्व परिवर्तन के साथ भारत की आंतरिक सुरक्षा नीति 'डिफेंसिव' (रक्षात्मक) से बदलकर 'प्रो-एक्टिव अटैक' (आक्रामक) हुई। केंद्रीय बलों (CRPF, BSF, ITBP) और राज्य पुलिस के बीच अभूतपूर्व तालमेल, शीर्ष कमांडर स्तर के लीडर्स के खात्मे और गांव-गांव तक विकास पहुंचाकर 6 दशक पुराने इस आंतरिक सुरक्षा खतरे को लगभग समाप्त कर दिया गया है।

सुधार और स्पष्टीकरण

India In Metro महत्वपूर्ण त्रुटियों को पारदर्शी रूप से सुधारता है। प्रमाण और स्टोरी लिंक के साथ editorial@indiainmetro.com पर लिखें।