7वें वेतन आयोग की सिफारिशों में ही यह सुझाव दिया गया था कि कर्मचारियों को अपने वेतन संशोधन (Pay Revision) के लिए 10 साल का लंबा इंतजार न करना पड़े। केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों (NC-JCM आदि) और कई अर्थशास्त्रियों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष यह मुख्य मांग रखी है कि 10 साल वाले पारंपरिक वेतन आयोग ढांचे को समाप्त कर एक नई स्वचालित व्यवस्था (Automatic System) लागू की जाए:
1. ऑटोमैटिक पे-रिवीजन मैकेनिज्म
महंगाई (Inflation) के आधार पर समायोजन: इस व्यवस्था के तहत, जब भी महंगाई भत्ता 50% की सीमा को पार करे, कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) में स्वतः ही संशोधन हो जाना चाहिए।
वार्षिक या द्विवार्षिक समीक्षा: 10 साल में एक बार बड़ा आयोग गठित करने के बजाय हर 2 से 3 साल में कॉस्ट ऑफ लिविंग इंडेक्स (Cost of Living Index) के आधार पर वेतन मैट्रिक्स को अपडेट करने का प्रस्ताव है।
"जस्टिस बी.एन. श्रीकृष्ण (7वें वेतन आयोग) की मूल सिफारिश -सरकार को 10 साल तक इंतजार करने के बजाय 'अकरॉयड फॉर्मूले' (Aykroyd Formula) का उपयोग करके कर्मचारियों के वेतन में समय-समय पर संशोधन करते रहना चाहिए, ताकि मुद्रास्फीति के प्रभाव को तुरंत संतुलित किया जा सके।"
3. कर्मचारियों को इससे क्या लाभ होगा?
10 साल बाद मिलने वाले एकमुश्त एरियर और वर्षों की देरी से राहत मिलेगी।
जीवन यापन की लागत के साथ वास्तविक समय का तालमेल: खुदरा महंगाई दर बढ़ते ही बेसिक पे में सुधार होगा, जिससे क्रय शक्ति बनी रहेगी। बार-बार के छोटे संशोधनों से विभिन्न पे-लेवल के बीच की विसंगतियां समय रहते दूर हो सकेंगी।
सरकारी घोषणा: केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 8वें वेतन आयोग के गठन और अध्यक्ष की नियुक्ति का आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी किया। आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू मानी जाएंगी।
वास्तविक भुगतान: आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने में 12 से 18 महीने का समय लगता है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद संशोधित वेतन का भुगतान 1 जनवरी 2026 से एरियर (Arrears) के साथ किया जाएगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान (2.28x – 2.46x): चूंकि 7वें वेतन आयोग की तुलना में इस बार विलय होने वाला DA कम (लगभग 50%–60%) है, इसलिए वास्तविक फिटमेंट फैक्टर 2.28x से 2.46x के बीच रहने की संभावना है।
कर्मचारी यूनियनों की मांग (3.61x – 4.00x): स्टाफ एसोसिएशनों (जैसे NC-JCM, BPMS) ने संशोधित एकरॉयड फॉर्मूले (Aykroyd Formula) के आधार पर 3.61x से 4.00x फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।
सातवें वेतन आयोग के तहत, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मूल वेतन 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का उपयोग करके ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गया।
4. नए बदलाव, पे-लेवल (Pay Levels) और रेलवे/मंत्रालयों पर प्रभाव
निचले स्तर के कर्मचारियों की पदोन्नति की बाधाओं को दूर करने के लिए पे मैट्रिक्स के लेवल 1, 2 और 3 को मिलाकर एक उच्च प्रवेश स्तर बनाने की मांग की जा रही है। इसी प्रकार कुछ मध्यवर्ती पर्यवेक्षी ग्रेड (जैसे Level 9 और Level 10) के विलय पर विचार किया जा रहा है।
भारतीय रेलवे के लाखों कर्मचारियों को रनिंग अलाउंस (Drivers/Guards), रिस्क एवं हार्डशिप अलाउंस, और कैडर रिस्ट्रक्चरिंग से सीधा बड़ा लाभ मिलेगा।
10 साल के लंबे इंतजार को खत्म करने के लिए ऑटोमैटिक पे-रिवीजन मैकेनिज्म (वार्षिक या द्विवार्षिक आधार पर सूचकांक-आधारित वेतन वृद्धि) शुरू करने की सिफारिश की जा सकती है।
5. फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) क्या है और यह कैसे तय होता है?
फिटमेंट फैक्टर एक कॉमन मल्टीप्लायर है, जिससे मौजूदा बेसिक पे (मूल वेतन) को गुणा करके नया मूल वेतन तय किया जाता है। यह अब तक के महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मिला देता है। पिछले वेतन आयोगों का फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन

6. न्यूनतम वेतन और रेलवे कर्मचारियों का वेतन (Level 1 / Group D)
वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000/माह है। अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के अनुसार रेलवे (ट्रैक मेंटेनर, हेल्पर आदि) और अन्य केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम basic pay इस प्रकार हो सकता है:
1.92x फिटमेंट फैक्टर पर: ₹34,560
2.28x फिटमेंट फैक्टर पर: ₹41,040
2.57x फिटमेंट फैक्टर पर: ₹46,260
2.86x फिटमेंट फैक्टर पर: ₹51,480
यूनियन मांग (3.68x / 3.83x पर): ₹66,000 – ₹69,000
बेसिक पे के अलावा मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (TA) और नया महंगाई भत्ता (DA) जुड़ने से न्यूनतम इन-हैंड सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी होगी।
7. वित्त मंत्रालय और कर्मचारी संगठनों के ज्ञापन (Representations)
मंत्रालय का रुख: वित्त मंत्रालय और व्यय विभाग (Department of Expenditure) ने स्पष्ट किया है कि आयोग सिविलियन, रक्षा कर्मियों और पेंशनभोगियों के संपूर्ण वेतन ढांचे की समीक्षा कर रहा है।
प्राप्त ज्ञापन: नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF), नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) और भारत पेंशनर्स समाज (BPS) की ओर से दर्जनों आधिकारिक मांग-पत्र आयोग को सौंपे गए हैं।
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