मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के कार्यकाल में कई मौखिक टिप्पणियाँ और मामले चर्चा में रहे।

जस्टिस सूर्यकांत की 'कॉकरोच' टिप्पणी विवाद (मई 2026)

मई 2026 में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणी ने देश भर के युवाओं और सोशल मीडिया पर एक बड़ा बवंडर खड़ा कर दिया।

53rd Chief Justice of India shree Suryakant

क्या था मामला?

वरिष्ठ अधिवक्ता के पद के विलंब से जुड़े एक अवमानना मामले और फर्जी वकालत डिग्री पर सुनवाई के दौरान पीठ ने फर्जीवाड़ा करने वालों और संस्था पर हमला करने वालों पर कड़ी नाराजगी जताई।अदालत में टिप्पणी करते हुए कहा गया: 

"There are parasites of society who attack the system... There are youngsters like cockroaches; they don't get any employment, and they don't have any place in a profession."

(समाज में ऐसे परजीवी हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं... कुछ युवा कॉकरोच की तरह हैं; उन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता और पेशे में कोई जगह नहीं होती।)

इस बयान के क्लिप्स वायरल होते ही युवाओं के बीच भारी रोष फैल गया। जनता में यह संदेश गया कि सीजेआई देश के बेरोजगार युवाओं और एक्टिविस्टों की तुलना "कॉकरोच" (तिलचट्टों) और "पैरासाइट्स" (परजीवियों) से कर रहे हैं। इसके जवाब में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर "कॉकरोच जनता पार्टी" (CJP) नाम से एक व्यंग्यात्मक आंदोलन शुरू हो गया, जिसने लाखों फॉलोअर्स हासिल कर लिए और दिल्ली, पुणे, बेंगलुरु में छात्र सड़कों पर उतर आए। यह आंदोलन बाद में नीट पेपर लीक जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय हो गया और सरकार के लिए राजनीतिक सिरदर्द बना।अगले दिन सीजेआई ने स्पष्टीकरण दिया:

“मैं दर्द में हूँ कि मीडिया के एक हिस्से ने मेरी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया। मैंने सिर्फ उन लोगों की आलोचना की थी जो नकली या फर्जी डिग्री लेकर बार (वकालत) जैसे पेशों में घुस गए।मैं भारतीय युवाओं को विकसित भारत के स्तंभ मानता हूँ।”

पूर्व CJI बी.आर. गवई: खजुराहो मूर्ति टिप्पणी और जूते से हमले का कांड

  • मूल बयान -
    खजुराहो मंदिर परिसर में भगवान विष्णु की क्षतिग्रस्त मूर्ति के जीर्णोद्धार को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए जस्टिस गवई ने याचिकाकर्ता से मौखिक रूप से कहा था:

    "Go and ask the deity himself to do something."
    (जाओ और भगवान से ही कहो कि वे खुद कुछ करें।)

सोशल मीडिया पर इस बयान को 'सनातन धर्म का अपमान' बताकर प्रचारित किया गया। 6 अक्टूबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर राकेश किशोर नामक एक वकील/याचिकाकर्ता ने पीठ की ओर जूता उछाल दिया और सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाते हुए नारेबाज़ी की। 

कोर्ट ने बाद में स्पष्ट किया कि टिप्पणी याचिकाकर्ता द्वारा जनहित याचिका का दुरुपयोग (Publicity Stunt) करने पर तंज के रूप में की गई थी, न कि भगवान या धर्म के प्रति अनादर प्रकट करने के लिए।

नालसर कन्वोकेशन और बीसीआई विवाद (अगस्त 2026)

नालसर यूनिवर्सिटी (हैदराबाद) ने सीजेआई को कन्वोकेशन का मुख्य अतिथि बनाने का निमंत्रण दिया। करीब 450 छात्रों ने विरोध किया। उन्होंने सीजेआई की जुलाई वाली टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें उन्होंने पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने से इनकार करते हुए कहा था कि “हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं”। 

जुलाई 2026 के छात्र प्रदर्शन को लेकर छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन को Supreme Court में एक lawyer ने Jantar Mantar के प्रदर्शन का मुद्दा उठाने की कोशिश की। रिपोर्टों के अनुसार CJI सूर्यकांत ने कहा:

“Don't waste our time, and don't waste your time.”

बीसीआई ने पूरे 2026 बैच के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का सर्कुलर जारी किया। बाद में इसे वापस ले लिया गया। सीजेआई ने खुद कहा कि बीसीआई का दखल “बिलकुल गलत” था और छात्रों के असहमति के अधिकार का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था।

एनसीईआरटी किताब विवाद (फरवरी 2026)

क्लास 8 की सोशल साइंस किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” वाला हिस्सा था। सीजेआई ने सुओ मोटो संज्ञान लिया और कहा:कोर्ट ने किताब पर बैन लगा दिया और इसे “अवमाननापूर्ण” बताया। बाद में कुछ आदेशों में नरमी भी आई।

“मैं किसी को भी इस संस्था की अखंडता को धूमिल करने नहीं दूँगा… चाहे वह कितना भी बड़ा हो।”

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